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वाराणसी के सौरभ वर्मा: बेजुबानो के मसीहा, 15 सालों से कर रहे हैं निःस्वार्थ सेवा

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वाराणसी की गलियों में आपको अकसर एक ऐसे शख्स दिख जाएंगे जो इंसानों से नहीं, बल्कि उन बेजुबान जानवरों से बात करते हैं, जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता। यह नाम है — सौरभ वर्मा, जो पिछले 15 वर्षों से “सौरभ डॉग कैनल” के नाम से वाराणसी में Pet Mart चलाते हैं और पालतू जानवरों की सेवा में समर्पित हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सेवा और जीवन का उद्देश्य है।




सेवा की शुरुआत: बचपन का लगाव बना जुनून

सौरभ वर्मा बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें जानवरों से गहरा लगाव रहा है। जब बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब वे मोहल्ले के कुत्तों और बिल्लियों को खाना खिलाते थे। समय के साथ यह लगाव एक जिम्मेदारी में बदल गया। उन्होंने तय किया कि वे इन बेजुबान प्राणियों के लिए कुछ करेंगे।
उन्होंने 15 साल पहले वाराणसी में Saurabh Dog Kennel & Pet Mart की स्थापना की, जहाँ आज वे सैकड़ों पालतू और आवारा जानवरों की सेवा कर रहे हैं।

सौरभ विभिन्न सामाजिक संस्थाओ से जुड़कर लगातार बेज़ुबानो की सेवा कर रहें हैं.
सौरभ व्यापारी नेटवर्क के टीम शिव के प्रेसिडेंट भी हैं






Pet Mart से लेकर Animal Care तक की यात्रा

शुरुआत में सौरभ वर्मा का Pet Mart केवल पालतू जानवरों की जरूरतों को पूरा करने का केंद्र था — जहाँ खिलाने का सामान, एक्सेसरीज़, और ग्रूमिंग की सुविधा मिलती थी।
लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने देखा कि वाराणसी जैसे शहर में कई ऐसे कुत्ते और बिल्लियाँ हैं जिन्हें न कोई खाना देता है, न इलाज करवाता है।
यहीं से उनके सामाजिक दायित्व की यात्रा शुरू हुई। उन्होंने अपने Pet Mart को एक सेवा केंद्र में बदल दिया जहाँ न केवल पालतू जानवरों का इलाज होता है, बल्कि सड़क के घायल या बीमार जानवरों की फ्री में सेवा की जाती है।




सड़क के कुत्तों के लिए “मसीहा”

सौरभ वर्मा हर दिन अपनी मोटरसाइकिल लेकर निकलते हैं — एक थैले में बिस्किट, दूध और खाना लेकर।
वे वाराणसी की गलियों, घाटों और बाजारों में जाकर उन कुत्तों को खिलाते हैं जो भूख और बीमारी से जूझ रहे होते हैं।
उनका कहना है —

> “ये जानवर भी हमारी तरह भूख, दर्द और प्यार महसूस करते हैं। फर्क बस इतना है कि ये बोल नहीं पाते। इसलिए मैं उनकी आवाज बनना चाहता हूँ।”



सौरभ न केवल उन्हें खाना खिलाते हैं बल्कि घायल या बीमार कुत्तों का फ्री इलाज भी करवाते हैं। कई बार वे अपने खर्चे से डॉक्टर बुलाते हैं या दवाइयाँ मंगवाते हैं।




फ्री ट्रीटमेंट और एडॉप्शन की सुविधा

सौरभ का Dog Kennel अब केवल एक Pet Mart नहीं रहा, बल्कि एक Shelter Home की तरह बन चुका है।
यहाँ हर समय कुछ न कुछ आवारा या घायल जानवर रहते हैं जिन्हें इलाज, प्यार और आश्रय की जरूरत होती है।
वे कहते हैं —

> “हम कोशिश करते हैं कि लोग इन कुत्तों को अपनाएँ, उन्हें घर दें। जो अपनाने नहीं आ पाते, उनकी देखभाल हम करते हैं।”



कई बार सौरभ खुद अपने पैसे से कुत्तों के लिए खाना, दवाइयाँ, और टीकाकरण का खर्च उठाते हैं।
वे चाहते हैं कि समाज के लोग भी आगे आएं और इस नेक काम में सहयोग करें।




कोविड के समय निभाई बड़ी जिम्मेदारी

कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा शहर बंद था, तब सौरभ वर्मा अकेले उन सड़कों पर निकले जहाँ कोई इंसान नहीं था — पर दर्जनों भूखे कुत्ते थे।
उन्होंने लॉकडाउन के पूरे समय हर दिन सड़क के जानवरों को खाना खिलाया, पानी पिलाया और बीमारों का इलाज किया।
उनके इस कदम की सराहना वाराणसी पुलिस और नगर निगम ने भी की।
उन्होंने कहा था कि —

> “जब सब अपने घरों में सुरक्षित थे, तब सौरभ जैसे लोग बाहर थे ताकि कोई जानवर भूखा न सोए।”






जनजागरूकता के लिए अभियान

सौरभ वर्मा केवल सेवा ही नहीं करते, बल्कि लोगों को भी जागरूक करते हैं कि पालतू जानवर रखना एक जिम्मेदारी है, फैशन नहीं।
वे स्कूलों, कॉलोनियों और आयोजनों में जाकर बच्चों और युवाओं को समझाते हैं कि जानवरों से प्यार करना एक इंसान की असली पहचान है।
वे कहते हैं —

> “कुत्ता पालना आसान है, लेकिन उसे प्यार, देखभाल और समय देना कठिन। इसलिए जो भी पालतू जानवर रखें, उसे परिवार का हिस्सा समझें।”






भविष्य की योजना: एनिमल हेल्थ कैंप और NGO

सौरभ की योजना है कि आने वाले समय में वे वाराणसी में एक बड़ा “Animal Health Care Center” और NGO खोलें जहाँ सड़क के जानवरों के लिए 24 घंटे इलाज और शेल्टर की सुविधा हो।
वे चाहते हैं कि डॉक्टर, पशु-प्रेमी और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस दिशा में काम करें ताकि किसी भी घायल या भूखे जानवर को सड़कों पर तड़पना न पड़े।




लोगों से अपील

सौरभ वर्मा का कहना है —

> “अगर हर व्यक्ति दिन में सिर्फ एक रोटी किसी जानवर को दे दे, तो कोई भी कुत्ता या बिल्ली भूखी नहीं रहेगी। ये छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”



वे यह भी बताते हैं कि कई लोग अब उनके सोशल मीडिया पेज के जरिए उनसे जुड़ रहे हैं और दान या खाने की सामग्री भेजकर मदद कर रहे हैं।
उनकी यह कोशिश अब एक आंदोलन का रूप ले रही है — एक ऐसा आंदोलन जो इंसानियत और करुणा को आगे बढ़ाता है।




वाराणसी के स्थानीय लोग सौरभ वर्मा को “Dog Lover Saurabh Bhaiya” के नाम से जानते हैं।
उनके पड़ोसी बताते हैं कि जब भी किसी मोहल्ले में कोई कुत्ता बीमार होता है, तो लोग सबसे पहले सौरभ को फोन करते हैं।
वह बिना देर किए पहुँच जाते हैं, चाहे रात हो या दिन।
उनकी यह तत्परता ही उन्हें लोगों के दिल में एक हीरो बना चुकी है।



सौरभ वर्मा जैसे लोग आज के समय में एक प्रेरणा हैं।
जहाँ लोग जानवरों को बोझ समझते हैं, वहाँ उन्होंने उन्हें अपना परिवार माना है।
उन्होंने यह साबित किया है कि इंसानियत केवल इंसानों की सेवा में नहीं, बल्कि उन बेजुबानों की देखभाल में भी है जो हमें बिना शर्त प्यार देते हैं।

वाराणसी के लोगों के लिए सौरभ वर्मा सिर्फ एक Pet Mart Owner नहीं, बल्कि जानवरों के सच्चे दोस्त और शहर के पशु-सेवक बन चुके हैं।
उनकी यह सेवा भावना समाज के लिए एक उदाहरण है कि अगर हम सब मिलकर थोड़ा भी योगदान दें, तो दुनिया हर जीव के लिए एक बेहतर जगह बन सकती है।




🗣️ सौरभ वर्मा कहते हैं:

“जानवर भगवान का ही रूप हैं, बस अंतर इतना है कि वे बोल नहीं सकते। उनकी सेवा करना ही सच्ची पूजा है।”



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