
टास्कर ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड: फ्रैंचाइजी के नाम पर सैकड़ों लोगों से करोड़ों की ठगी, पीड़ितों का आक्रोश चरम पर
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लखनऊ, 15 फरवरी 2026 (स्पेशल रिपोर्ट)**: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित टास्कर ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, जो खुद को ‘भारत का पहला हेल्थकेयर मॉल’ बताकर प्रचारित करती है, फ्रैंचाइजी के नाम पर सैकड़ों निर्दोष लोगों को ठगने का केंद्र बनी हुई है। कंपनी ने दावा किया था कि वह दवाइयों, लैब टेस्ट, चिकित्सा परामर्श और वेलनेस सेवाओं का एक स्टॉप-शॉप प्रदान करेगी,= लेकिन वास्तविकता में यह करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का अड्डा साबित हुई है। पीड़ितों के अनुसार, कंपनी के मालिक प्रशून पाल, विकास पाल और स्टाफ मेंबर- अनीषा अभी भी बड़े पैमाने पर लोगों को चूना लगा रही है। वाराणसी के निवासी अम्बर मौर्य जैसे सैकड़ों प्रभावित व्यक्ति अब लखनऊ में कंपनी के ऑफिस के सामने धरना देने और चेक जमा करने की तैयारी कर रहे हैं। यह मामला अब सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।
कंपनी की स्थापना 2022-23 के आसपास हुई थी, जब कोविड-19 महामारी के बाद हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश का क्रेज चरम पर था। टास्कर ने सोशल मीडिया, लिंक्डइन और जस्टडायल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आकर्षक विज्ञापनों के जरिए फ्रैंचाइजी मॉडल को बढ़ावा दिया। दावा था कि 30 मिनट में दवाइयां डिलीवर होंगी, वर्चुअल कंसल्टेशन/ उपलब्ध होंगे और फ्रैंचाइजीधारकों को मोटा मुनाफा मिलेगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। ग्लासडोर, एम्बिशनबॉक्स और जस्टडायल पर दर्ज सैकड़ों रिव्यूज में कंपनी को ‘फ्रॉड’ और ‘धोखेबाज’ करार दिया गया है। एक पूर्व कर्मचारी ने ग्लासडोर पर लिखा, “कई महीनों बाद सैलरी नहीं मिलती और सीईओ प्रशून पाल केवल बहाने बनाते हैं।” इसी तरह, लिंक्डइन पर एक कमेंट में कहा गया, “यह फ्रॉड कंपनी है, निवेश/ लो और फिर कुछ न दो।”
अम्बर मौर्य की कहानी इस धोखाधड़ी की अमानवीयता को उजागर करती है। वाराणसी के रहने वाले अम्बर, जो एक छोटे व्यवसायी हैं, ने 2025 में कंपनी की चकाचौंध भरी मार्केटिंग से प्रभावित होकर फ्रैंचाइजी में निवेश- किया। उन्होंने बताया, “मैंने 35 लाख रुपये दिए, एग्रीमेंट में लिखी सेवाएं और बिजनेस मॉडल का पालन नहीं किया गया। कंपनी ने स्टॉक देकर वादा किया था कि सप्लाई चेन मजबूत होगी, लेकिन- स्टॉक लेकर वे गायब हो गए। पेमेंट के लिए चार चेक दिए, जो हर बार बैंक में डालने पर ‘रुक जाइए, 2-3 दिन में ट्रांसफर हो जाएगा’ का बहाना बनाते रहे।” अम्बर ने कहा कि अब वे सभी चेक कल बैंक में जमा करेंगे और अगर भुगतान नहीं हुआ तो लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कंपनी ऑफिस के सामने धरना देंगे। “हम सक्षम अधिकारियों को भी अवगत कराएंगे। यह केवल मेरी नहीं, सैकड़ों लोगों की कहानी है।”-
अम्बर अकेले नहीं हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर हाल की पोस्ट्स से साफ है कि कंपनी की ठगी पूरे देश- में फैली हुई है। दिसंबर 2025 में हृषभ वर्मा ने लिखा, “टास्कर हेल्थकेयर मॉल फ्रॉडुलेंट फ्रैंचाइजी है। अब तक 15-20 करोड़ की ठगी कर चुकी है। अभी भी फोन करके फ्रैंचाइजी बेच रही है। कार्रवाई होनी- चाहिए।” जुलाई 2025 में जाहिद खान ने जयपुर के फ्रैंचाइजी मालिकों की शिकायत की, “कंपनी ने फ्रैंचाइजी देकर धोखा दिया, पैसे खाकर भाग गए।” अप्रैल 2025 में- नितीश गुप्ता ने एक फोटो शेयर करते हुए कहा, “टास्कर हेल्थकेयर निर्दोष निवेशकों का पैसा लूट रही है, हेल्थकेयर सेटअप के नाम पर।” मार्च 2025 में धीरज आनंद ने सीधे कंपनी हैंडल @taskar_s और- प्रशून पाल को टैग करते हुए चेतावनी दी, “ये स्कैम्स्टर्स हैं, फ्रॉड हैं।” ये पोस्ट्स न केवल हिंदी बल्कि अंग्रेजी में भी हैं, जो ठगी के राष्ट्रीय स्तर को दर्शाती हैं।
कंपनी के मालिक प्रशून पाल और विकास पाल पर कई आरोप लगे हैं। एम्बिशनबॉक्स पर एक फ्रैंचाइजी मैनेजर ने लिखा, “फ्रॉड फ्रैंचाइजी और फ्रॉड एम्प्लॉयमेंट का सबसे बुरा केस।” जस्टडायल पर दिल्ली के त्रिनगर ब्रांच के रिव्यू में एक यूजर ने कहा, “यह फ्रॉड कंपनी है, स्टाफ अनरिस्पॉन्सिव है, प्रोडक्ट्स खराब क्वालिटी के।” स्टाफ मेंबर अनीषा का नाम भी पीड़ितों द्वारा लिया जा रहा है, जो कथित तौर पर नए निवेशकों को लुभाने में सक्रिय है। कंपनी का ऑफिसल वेबसाइट और ऐप मेडिनोस अभी भी सक्रिय है, जहां 25% डिस्काउंट के झूठे ऑफर चल रहे हैं। लेकिन पीड़ितों का कहना है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद भी सेवाएं नदारद हैं।
यह ठगी केवल फाइनेंशियल लॉस तक सीमित नहीं है। कई पीड़ितों ने मानसिक तनाव और परिवारिक कलह की शिकायत की है। कानपुर के एक निवासी ने एक्स पर लिखा, “कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट बनाए लेकिन खुद फॉलो नहीं किए। कंप्लेंट करो तो इग्नोर।” जयपुर के फ्रैंचाइजी ओनर्स ने बताया कि स्टॉक सप्लाई रुक गई और पेमेंट डिफॉल्ट हो गया। कुल मिलाकर, अनुमानित नुकसान 20 करोड़ रुपये से अधिक है, जो छोटे-मध्यम व्यवसायियों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। एक यूट्यूब वीडियो में कंपनी ने खुद को ‘रियल फ्रैंचाइजी ओनर की स्टोरी’ बताकर प्रचार किया, लेकिन कमेंट्स में फ्रॉड के आरोप ही दिखते हैं।
अब पीड़ित एकजुट हो रहे हैं। अम्बर मौर्य ने कहा, “हम लखनऊ में धरना देंगे और पुलिस, कंज्यूमर फोरम तथा स्वास्थ्य मंत्रालय को शिकायत करेंगे।” हृषभ वर्मा जैसे यूजर्स ने पीएमओ, कंज्यूमर अफेयर्स और मीडिया को टैग किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 447 (फ्रॉड) और आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दर्ज हो सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस को भी अलर्ट किया जाना चाहिए, खासकर जब कंपनी लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में सक्रिय है।
कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उनके सोशल मीडिया हैंडल पर केवल प्रमोशनल पोस्ट्स हैं। लेकिन पीड़ितों का संदेश साफ है: “टास्कर जैसी कंपनियां हेल्थकेयर के नाम पर लूट नहीं कर सकतीं।” अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है। सरकार और नियामक संस्थाओं को तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए ताकि निर्दोषों को न्याय मिले।
(लेखक: यूपी वाणी। यह रिपोर्ट पीड़ितों के बयानों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और ऑनलाइन रिव्यूज पर आधारित है।)



